थी सागर तट की सुहानी भोर ;सुनाई दे रहा था लहरों का शोर
कहीं थी चांदी कहीं था सोना ,धरा था जल ने रूप सलोना ;
गुनगुनाते मांझी खींचे जा रहे थे डोर ,देख कर मै हुई विभोर ;
लग रहा था सूरज नभ का दिठौना,छोड़ा था पंछियों नेअपना बिछौना
थिरक रहीं थीँ मछलियाँ चहुँ ओर ,ज़्युँ नाचे जंगल में मोर ;
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आँगन बगिया में कुछ फूल खिले हैं ,महका है घर का आँगन सूखी धरती पर जैसे रिमझिम बरसा हो सावन नया बन गया पत्ता पत्ता धुल सा गयाहै गुलशन नया रूप लिया इस आँगन ने बन गया सुंदर उपवन , महकती रहे ये फुलवारी आहान अमाया से सुमन खिलें चहचहाती रहे बगिया पंछी ऊंची उड़ान भरें प्रेमरस की हो फुहार सुखशांति फूलेफले . शीतलता हो मन्दिर सी महकती बयार चले मधुरता हो रिश्तों में एक दूजे से स्नेह रहे आस्था रहे ईश्वर में सदा उसी का ध्यान करें यही प्रार्थना है प्रभुआप इसे वह स्वीकार करें ; rajshree
मेरी बहना परदेस में रहती है मेरी एक बहना उससे है मुझको इतना ही कहना , रहे खुश सदा मुस्कुराती रहे वो मुरादें हों पूरी ,खिलखिलाती रहे वो न भूलें फूल उसकी क्यारी में महकना खनकाती रहे वो हीरों के कंगना दिलों में सबकी जगह पाए वो मिले मान उसको जिधर जाए वो संबंधों में पाए कभी भी गम ना छोटी बहिन का है उससे कहना समझती है रिश्तों का मोल वो रखती है उनको संजो के सदा वो साथ देते हैं उसका सदा उसके सजना पूरा हो दोनों का हर एक सपना ;
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